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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 191, Verse 65

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 191, verse 65 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 191 · श्लोक 65

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अविचार से तुच्छता का ज्ञान न होने के कारण ही बालक को भी दुःख होता है, किन्तु विचार द्वारा तुच्छता का ज्ञान होने पर उसके नाश आदि में दुःख नहीं होता है, यह आप भी विचार कीजिये, ऐसा कहते हैं। श्रीवसिष्ठजी ने कहा : संकल्पमात्र से सम्पन्न जगत्‌ के नष्ट होने पर दुःख कैसे हो सकता है ? जो जगत्‌ संकल्पमात्र तथा चित्तमात्र है उस चित्त का आप भी विचार कीजिये