Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 192, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 192, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 192 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
बुद्धे यावदियं नाम जगद्भ्रान्तिर्न किंचन ।
न चाभून्न च वास्तीयं न च नाम भविष्यति ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
यौक्तिक दृष्टि से
जगदाकार दिखाई देनेवाली यह भ्रान्ति (विक्षेपशक्ति प्रधान अविद्या) ही स्फुरित होती है। तत्त्वदृष्टि
से तो वह भ्रान्ति भी है ही नहीं, केवल ब्रह्म सत्ता ही हे