Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 193, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 193, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 193 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
सम्यग्ज्ञातं यावदिदं जगद्ब्रह्मैव केवलम् ।
अज्ञातात्माभवद्ब्रह्म ज्ञातात्मन्यधुना स्थितम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मृगतृष्णा जल, गन्धर्वनगर और द्विचन्द्र का भ्रम विचार करने से प्रतीत नहीं
होता वैसे ही यह अविद्याजनित भ्रम भी तत्त्वविचारविमर्श करने से शेष नहीं रहता है