Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 193, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 193, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 193 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
प्रबुद्धोऽस्मि प्रशान्ता मे सर्वा एव कुदृष्टयः ।
शान्तं समं सोहमिदं खं पश्यामि जगत्त्रयम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मन्, स्वप्न में अपने मरण के अनुभव की
तरह भ्रान्ति का अनुभव मिथ्या ही है उक्त भ्रमानुभव अविचारजनित हे । विचार करने से इसकी शान्ति
हो जाती है