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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 194, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 194, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 194 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

द्वैत ओर अद्वैत का अनुसन्धान करने पर मन में उदित हुआ जो द्वैत ओर अद्वैत का समुन्मेष है उससे जनित वाक्य व्यवहारो, सन्देहो ओर विभ्रमो से हमारा कोई प्रयोजन नहीं है । सबसे पहले "सदेव सौम्येदमग्र आसीत्‌ (इत्यादि श्रुतियों से सिद्ध जो निर्मल परमब्रह्म है, उसीका यह सव कुछ भान है