Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 194, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 194, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 194 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
इस समय जगद्भान कैसे सम्पन्न हुआ ? इस प्रश्न पर उसे कहते है ।
जैसे आकाश में केशोण्ड्क, मोती की माला, गन्धर्वनगर आदिकी अभेद से स्थिति हे वैसे ही
चिदाकाश में त्रिजगत्रूप आकाश की अभेद से स्थिति है