Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 194, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 194, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 194 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
जैसे आकाश में आकाशत्व अभेद से
सामान्यरूप से ओर आकाशरूप से स्थित हे, जैसे पाषाण में पाषाणत्व, जल में जलत्व अभेद से स्थित
है वैसे ही चिद्घन ब्रह्म मेँ जगत् अभेद से, ब्रह्मरूप से स्थित हे