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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 194, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 194, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 194 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

भगवन्‌, दिशाओं मेँ ओर आकाश में असंख्यरूप से विस्तृत भी अहंकारादि सहित त्रिलोकीरूप दृश्यको आप शान्त आकाशरूप शून्यता से उदित महाचेतन का उदर ही समझिये