Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 195, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 195, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 195 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
वैराग्य होना ही बोध की बोधता (सार्थकता) हे । वह पंडिताई केवल मूर्खता ही है जिसमें
विरक्ति नहीं है