Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 195, Verses 43–70
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 195, verses 43–70 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 195 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
पूर्ववर्णित वासनाविहीन भाव के
उदित होने पर ओर सकल जगत् ब्रह्म ही है यों ज्ञान होने पर एकमात्र निर्वाण में स्थिरमतिवाले
शुद्धअन्तःकरण पुरुष में मोक्ष नामक असीम प्रशम उदित होता हे