Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 196, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
TODO
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, बड़े हर्ष की बात है आप प्रबुद्ध हो गये हें । आपकी यह
वाणी अप्रबुद्ध लोगों के पापों का नाश करनेवाली तथा अनुभवसिद्ध अर्थ का अनुवादरूप होने ओर
युक्तियुक्त होने से प्रबुद्ध पुरुषों को प्रहर्ष से प्रसन्नवदन बनानेवाली हो गई है
सर्ग सन्दर्भ
एक सौ चौरानबेवाँ सर्ग समाप्त एक सौ पचानबेवाँ सर्ग प्रबुद्ध हुए श्रीरामचन्द्रजी की सुन्दर उक्तियों की प्रशंसा कर गुरु द्वारा किये गये प्रश्नों का श्रीरामचन्द्रजी द्वारा समाधान |