Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 195, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 195, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 195 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
जैसे स्फुरित हो रही सूर्य की दीप्ति घट, पट आदि का प्रकाश करती है वैसे ही स्फुरित हो रही अकर्तृरूपा
यह ज्ञप्ति ही इस सम्पूर्ण ज्ञेय घट, पट आदि पदार्थो का निर्माण करती है