Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 195, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 195, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 195 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
वास्तव में एकरूप (अद्वितीय) माया से अनन्त रूपवाले परमात्मा की जगत्
अधिष्ठानस्वभावता कारण का अभाव होने से न उदित होती है ओर न अस्त को प्राप्त होती है