Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 196, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
ऐसा होने पर जो फलित हुआ उसे कहते है।
इस प्रकार यह समो से भी सम (सर्वथा विषमतारहित) विग्रहवाला जन्मनाशशून्य अद्वितीय शान्त
ब्रह्म महाकाश ही है, जगत्कथा कहाँ है ?