Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verses 27–28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 196, verses 27–28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 27,28
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हिन्दी अर्थ
जैसे जल में लहरियो के उतराने ओर डूबने से जल में
भिन्नता नहीं आती वैसे ही ब्रह्म मे अन्य जन्म ओर विनाशो से यानी सृष्टि ओर प्रलयो से अन्यता नहीं
आती है । जैसे जल में जलबिन्दु एकरस हो जाता है वैसे ही सारअसारविवेकवान् कोई महात्मा पुरुष
इस शुद्ध परम पद में एकरसता को प्राप्त होते हैं