Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 196, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 36
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हिन्दी अर्थ
निर्विकार निराकार से विकारवान् ओर साकार का आविर्भाव होता है यह हमने कहीं लोक में
न देखा है ओर न शास्त्रों में सुना ही हे