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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 196, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 39

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

शान्त (सर्व उपरतिरूप) परमब्रह्म साकारजगत्‌ का तादात्म्य से (अभेदसम्बन्ध से) आधार है यह कथन शोभा नहीं देता, क्योकि साकार पदार्थ अविनाशी है यह कथन कहाँ शोभा पा सकता हे ?