Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 196, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 62
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हिन्दी अर्थ
हे
गुरुवर, मैं आकाश हूँ, आप आकाश हैं, चित् आकाश है, आकाश आकाश ही है । आप चिदाकाशरूपता
को प्राप्त होकर मेरे कथन की परीक्षा के लिए एकाकाशरूपता का भजन कीजिये