Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 63
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 196, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 63
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हिन्दी अर्थ
हे गुरुवर,
ब्रह्माकाशभाव से स्थित, आकाशकल्प स्वरूप ज्ञान से सर्वात्मक चिदाकाश सदुश दो चरणवाले जीवों
में सर्वश्रेष्ठ आपको मैं ज्ञेय पूणनिन्द ब्रह्म के, अभेद से जानने के कारण प्रणाम करता हूँ