Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 70
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 196, verse 70 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 70
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हिन्दी अर्थ
उक्त विषय का ही साररूप से संक्षेप कर उपसंहार करते है।
सकलशास्त्रों के अर्थो से अतीत, अनुभवमात्रैकगम्य, चिह्न (आकृति) रहित, अतएव नाम ओर
कल्पना से रहित, शुद्ध, चिदात्मक, एक, निर्भय, नामरूप रहित आद्य चिदाकाश ही है, उससे अतिरिक्त
अणुमात्र भी नहीं है । उसके मल की शंका के लिए तनिक भी स्थान नहीं हे