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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 197, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 197, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 197 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

उक्त चिन्तामणि से उन्हें समग्र विभूतियाँ प्राप्त हुई, अतः परम सुखी होकर वे वहाँ सुख से रहने लगे । वे लकड़ियों के पाने के लिए उद्योगशील हुए थे। सब पदार्थो को देनेवाली बहुमूल्यमणि को पाकर जैसे देवता स्वर्ग मे सुख से रहते हें वैसे ही शीतोष्णादि दुःख रहित होकर रहने लगे