Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 197, Verses 25–34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 197, verses 25–34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 197 · श्लोक 25,26
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
उन कीरकदेशनिवासी बहँगी ढोनेवाले लोगों
को लकड़ियों के लिए किये गये उद्योग से ही बहुमूल्य उत्तम मणि मिली । उक्त सकलपदार्थो तथा
उत्तमोत्तम धनं से प्राप्त हुई पूर्णतावश भय, मोह, विषाद ओर क्लेश से रहित हो आनन्दपूर्ण बुद्धिवाले
वे अन्य लाभ-हानियों के विषय में समता को प्राप्त होकर रहते थे