Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 198, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 198, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 198 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे मुनिश्रेष्ठ, जैसे मैं इस वैवधिकों के (बहँगी ढोनेवाले कीरकों के) क्रम
का तात्पर्य भलीभाँति निस्संदेहरूप से समझ जाऊँ, हे सम्मान्य, कृपया आप वैसा स्पष्ट विवरण
कीजिये
सर्ग सन्दर्भ
एक सौ छानबेवाँ सर्ग समाप्त एक सौ सतानबेवाँ सर्ग वैवधिकाख्यान- तात्पर्य के व्याख्यान क्रम से आत्मज्ञान में गुरु, शास्त्र आदि की स्पष्टतः हेतुता का वर्णन ।