Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 198, Verses 2–4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 198, verses 2–4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 198 · श्लोक 2-4
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामजी, जिन वैवधिकों का (बहँगी ढोनेवालों का) जिक्र
मैंने आपसे किया है, हे महातपस्विन्, उन्हें आप ये भूतलवर्ती मानव जानिये ओर उनका जो दारिद्रयदुःख
है उसे आप अज्ञान जानिये । जो वह महावन मैंने कहा है उसे आप गुरु, शास्त्र आदि जानिये । जो उन्हें
भोजन के लिए उद्यत हुए कहा वह भोगार्थी लोगों की ओर इशारा है । अत्यन्त कृपण पुरुष अन्य कार्यों
की उपेक्षा कर मेरी भोगराशियाँ सिद्धि को प्राप्त हों इस बुद्धि से शास्त्रों में (शास्त्र प्रतिपादित उपायों मे)
प्रवृत्त होता हे