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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 197, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 197, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 197 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

ऐसी अवस्था में सकल संकल्प-विकल्पों से शून्य परम ज्ञेय ब्रह्म केवल संविद्रूप तीनों अवस्थाओं से अतीत स्वप्रकाशवस्तु से लभ्य है, अतएव जाग्रत्‌ अवस्था के अन्तर्गत गुरु ओर शास्त्र आदि का अगम्य होने के कारण अतिदुर्गमता को प्राप्त हुआ हे