Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 198, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 198, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 198 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
TODO
हिन्दी अर्थ
सव लोगों की स्वभावतः सन्मार्गप्रवृत्ति में साधुओं का सदाचार दर्शन ही कारण है, इसलिए साधुओं
का लक्षण दशति हुए कहते हैं।
जो निरन्तर परोपकार में प्रवृत्त होता है वह साधु कहा गया है । उसकी चेष्टा सब लोगों के लिए
प्रमाण हे