Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 198, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 198, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 198 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
अपनी-अपनी वासना के अनुसार शास्त्र के अन्यादृश फल की संभावना करते हुए
लोग उसमें प्रवृत्त होते हैं पर जैसे वैवधिक लोगों को मणि मिली थी वैसे ही शास्त्रों से वाणी और मन का
अगोचर निर्विषय निरतिशय सुख प्राप्त करते हे । यानी जैसे वैवधिक लकड़ियों के लिए वन में गये थे ओर
उन्हें मणि मिली वैसे ही शास्त्रों द्वारा लोगों को अन्य परमोत्तम फल प्राप्त हो जाता हे