Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 198, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 198, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 198 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
जिस
पुरुष को परमब्रह्मरूप उत्तम तत्त्व का साक्षात्कार नहीं हुआ वह विषयभोग के लिए सन्देह से (इससे
विषयभोग की प्राप्ति होगी या नहीं यों संशय से) शास्त्र आदि में प्रवृत्त होता है, फिर उससे परमपद को
प्राप्त होता हे