Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 198, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 198, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 198 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
TODO
हिन्दी अर्थ
बार-बार अभ्यास करने से शास्त्र
से विशुद्ध हुआ, सकल भोगों की इच्छा से रहित तथा प्रतिदिन अन्तर्मुख होने के कारण प्रत्यगात्मा
की ओर झुका हुआ चित्त परम पुनीत ब्रह्मपद का साक्षात्कार करता है