Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 198, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 198, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 198 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
TODO
हिन्दी अर्थ
जैसे सूर्य ओर समुद्र के दर्शन से देह में उनके वैधर्म्य आदि का
बोधरूप विवेक होता हे वैसे ही शास्त्रकृत विवेक से भी देह में स्वभावतः सकल उपाधियों से असंस्पृष्ट
अद्वितीय ज्ञेय का ज्ञान होता हे