Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 198, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 198, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 198 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
ऊपर (पुनः पुनः आत्मतत्त्व के परीक्षण से“ कहा है उस पर किस प्रमाण से कैसे परीक्षण से ? ऐसी
शंका होने पर कहते है ।
जैसे कोल्हू मे पेरने से निकले हुए ईख के रस से स्वादिष्ट मधुर स्वाद अपने अनुभव से प्राप्त होता
है वैसे ही सूत्र, भाष्य, उनके विविध व्याख्यान, महारामायण (योगवासिष्ठ) आदि शास्त्र ओर गुरु के
उपदेशरूप उपाय से "तत्वमसि" आदि महावाक्यार्थ का साररूप (“तत् पद ओर ^त्वम्* पद वाच्य अर्थ
के परिशोधन से प्राप्त रसभूत वाक्यार्थ का अपरोक्ष अनुभवरूप) स्वात्मज्ञान प्राप्त होता हे