Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 198, Verses 33–44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 198, verses 33–44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 198 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त सब कुछ शास्त्र के अधीन है, इसलिए शास्त्राध्ययन आवश्यक है ऐसा कहते हैं ।
पूर्वोक्त यह सब ज्ञान, समता, निर्विकल्प स्वरूपस्थिति आदि शास्त्र आदि से प्राप्त होता है,
इसलिए सकल प्रयत्नों से शास्त्र आदि का अभ्यास करे