Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 198, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 198, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 198 · श्लोक 32
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हिन्दी अर्थ
जो शास्त्रश्रवण ज्ञान की प्राप्ति के लिए होता है
वही शास्त्र श्रवण है, वही ज्ञान है जिससे समता होती है, वही समता है जिसमें जाग्रत् में भी सुषुप्ति की
स्थिति (निर्विकल्पस्वरूप स्थिति) होती है