Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 2, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 2, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
सा चादेहं समुच्छेत्तुमृते बोधान्न शक्यते ।
राम केवलमेषान्तः कर्ममूलकरा परा ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, यही चिदाभाससंवित् भीतर अन्य कर्मों के मूल काम, वासना आदि को पैदा
करने में तत्पर और श्रेष्ठ है