Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 2, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 2, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
यन्नाशनीयं निपुणं तन्नूनं च विनाश्यते ।
मूलकाषेण भगवन्न शाखादिविकर्तनैः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी ने कहा : हे भगवान्, जो नाशनीय अंश है, उसका भलीभाँति मूलोच्छेदपूर्वक नाश
कर देना चाहिए, केवल शाखा आदि को कतरकर नहीं