Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 20, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 20, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
तं चेतति तदाभासं पूर्णमात्मस्थमात्मना ।
तत्र तन्मयतां धत्ते तेन तन्मयरूपिणी ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी ब्रह्म के आभासरूप आनन्द का, जो शुक्रयुत जीवात्मक चैतन्य
में स्थित् है, वीर्यरूप स्वभाव के द्वारा अनुभव करता है, उसी में तादात्म्याध्यासरूप तन्मयता
धारण कर चिति तद्रूप बन जाती है