Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 200, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 200, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 200 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
इति शृण्वन्सभां लोको विस्मयोत्फुल्ललोचनः ।
कुसुमासारसंपूर्णां राजीवानां ददर्श ताम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
उनमें कुछ लोगों ने संन्यास विधि से अपने पूर्वाश्रम के आचार का परित्याग
कर दिया है और कोई ब्रह्मचर्य आदि आश्रमधर्म में स्थित हैं। कोई लोग प्रबुद्धमति हैं और कोई नित्य
उन्मत्तकी-सी चेष्टा करते हैं