Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 200, Verse 41

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 200, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 200 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

आनन्दबाष्पसंपूर्णनयनो नयकोविदः । गुरुं परमया भक्त्या प्रणनाम पुनःपुनः ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

हे सौभाग्यशाली राघव, आपके ज्ञानवोधन के लिए इससे भिन्न शुभ उपदेशयोग्य कुछ नहीं है, क्योकि आपका आद्य ज्ञानतत्त्व पूर्णतया उदय हो चुका ओर आपने अब सम्पूर्ण ज्ञातव्य वस्तु जान ली