Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 200, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 200, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 200 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

कोलाहलः समुदभूद्भूरिपूरितदिंमुखः । मधुरः पवनात्तानां कीचकानामिवारवः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे अपना घर निर्दोष है तो अन्य जगह बैठने की क्या आवश्यकता है वैसे ही अन्यत्र अन्य कोई न कोई कार्य करना ही है तो शास्त्रीय और अशास्त्रीय कर्मो के क्रम के समान होने पर भी शास्त्रीय सत्कर्म में (सदाचार में) कौन दोष है जिससे अपने क्रम का त्याग कर अन्यथा आचरण किया जाय ?