Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 201, Verse 65
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 201, verse 65 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 201 · श्लोक 65
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हिन्दी अर्थ
उसी प्रकार आकाशस्थ सिद्ध पुरुषों ने श्रीवसिष्ठजी
की प्रशंसा की, सभास्थित पुरुषों ने भी उन सिद्धो का प्रचुर स्तुतियों के साथ पूजन किया