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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 201, Verse 66

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 201, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 201 · श्लोक 66

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

आकाश स्थित महर्षि तथा देवताओं ने, भूमि में स्थित ब्राह्मणों तथा राजाओं ने तथा पृथिवी ओर आकाश में स्थित मुनीश्वरों ने पूर्ववर्णित प्रकार से अपनी अपनी शक्ति के अनुसार प्रत्येक पुरुष की पुष्पार्ध्यदान युक्त उच्च जय जयकार वाणी से पूजा की