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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 202, Verses 34–35

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 202, verses 34–35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 202 · श्लोक 34,35

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे पुत्र, हर्ष है कि आपने आत्मतत्त्वज्ञानी होकर बोध से रघुवंशियों की अतीत, वर्तमान और भावी कुलसन्तति को पवित्र कर दिया है। हे रघुनाथ, इस समय आप मुनिनायक श्रीविश्वामित्र की इस यज्ञविघ्ननिवृत्ति की अभ्यर्थना को पूर्णकर पिता के जीतेजी उनकी आज्ञा से राक्षसवध द्वारा पृथिवी का पालनकर स्थित होइये