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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 202, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 202, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 202 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अभूम वयमात्मीयकायमात्रदृशः पुरा । प्रभो संप्रति संपन्ना विष्वग्विश्वावलोकिनः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

हे राम, आप अपने विशाल कुलरूप आकाश के चन्द्रमा है । हे कमलनेत्र आप इससे अतिरिक्त क्या सुनना चाहते हैं अपनी इच्छा के अनुसार बतलाइए