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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 202, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 202, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 202 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

स्थितोऽस्मि सर्वसंपूर्णः संपन्नोऽस्मि निरामयः । जातोऽस्मि विगताशङ्को बुधो जागर्मि संप्रति ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे रामजी, आज इस स्थिति का स्वयं आप कैसा अनुभव करते हैं इस जागतिक आभास को आप कैसा देखते हैं ? यह बतलाइये