Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 202, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 202, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 202 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
आनन्दितोऽस्म्यखेदाय सुखितोस्मि चिराय च ।
स्थितोऽनस्तमयायैव शाश्वतार्थोदयो मम ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवान् वसिष्ठजी के यह कहने पर गुरु के मुँह को देख रहे राजकुमार श्रीरामचन्द्रजी ने
बिना घबड़ाहट या हिचकिचाहट के मृदु तथा स्पष्ट वचन कहा