Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 205, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 205, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 205 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
काश्चिन्महीकोशगताः काश्चिदाकाशसंस्थिताः ।
तेजःकोशगताः काश्चित्काश्चित्पवनकोशगाः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसका निराधार निराकार आत्मा ही व्योमरूप है, आकृति के अभाव में इस व्योम का आधार
से क्या प्रयोजन है ?