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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 206, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 206, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 206 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

काश्चिदाकाशकोशस्थाः काश्चिच्चोपलकोशगाः । किंच वा भूतभूतादि कुतो बुद्ध्यादयः कथम् ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

उसके (चिद्भान के) सद्भाव से ही उसमें बहुत-से विवर्त हुए हैं, ऐसा कहते हैं। बहुत-सी भिन्न-भिन्न सृष्टि दृष्टियाँ ब्रह्मरूप ही हैं। जैसे आकाश में शून्यता स्थित है वैसे ही वे ब्रह्माकाश में ही स्थित हैं और प्रवेश करती हैं