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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 207, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 207, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 207 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

सर्वे तावज्जगद्भावा असद्रूपाः सदैव हि । सद्रूपाश्च सदैवेमे यथासवेदनं स्थितेः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महाबुद्धे, कभी किसी ने मुझसे प्रश्न किये थे इस विषय में सम्यक्‌ ज्ञान की खूब पुष्टि के लिये आगे कहे जा रहे इस महाप्रश्न को ओर सुनिये