Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 209, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 209, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 209 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
क्षेत्राणामर्थधर्माणां सर्वेषां प्रति तं फलम् ।
ब्रह्मणा कल्पितं सर्गे स्वके संकल्पपत्तने ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि ब्रह्म ही अज्ञानवश दृश्यबोध से दृश्य के रूप में प्रतीत होता है और ब्रह्मज्ञान
से ब्रह्म ही है, इसलिए यह जगत् ब्रह्मसंकल्पनगररूप से स्थित है