Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 210, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 210, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 210 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
त्वयार्थो देहशब्दस्य यो बुद्धः स महामते ।
तत्त्वज्ञं प्रति नास्त्येव शिलानृत्तमिवाम्बरे ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
संकल्पनगर और स्वप्ननगर में जो भ्रान्ति मालूम होती है जाग्रत्रूप स्वप्न में उससे अधिक ही यह
भ्रान्ति अनुभूत होती है उससे कम अनुभूत नहीं होती